‘मेरा पोता व्योम जिंदा भी है या नहीं…’, बहू निकिता सिंघानिया की गिरफ्तारी के बाद अब अतुल के पिता को सताया इस बात का डर

R. S. Mehta
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AI सॉफ्टवेयर इंजीनियर अतुल सुभाष की पत्नी निकिता सिंघानिया, सास निशा और साले अनुराग को अरेस्ट कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. 14 दिसंबर को तीनों की गिरफ्तारी हुई. अब इस बीच अतुल के पिता का बयान सामने आया है. उन्होंने सबसे पहले बेंगलुरु पुलिस का धन्यवाद किया. कहा- मैं पुलिस का शुक्रगुजार हूं कि पुलिस ने मेरे बेटे के गुनाहगारों को गिरफ्तार कर लिया है. लेकिन मेरा पोता व्योम कहां है, इसकी हमें कोई जानकारी नहीं है. हमें उसकी चिंता सता रही है.

अतुल के पिता पवन मोदी ने कहा- पता नहीं निकिता ने मेरे मासूम पोते को कहां रखा है. वो जिंदा है भी या नहीं. कुछ नहीं पता. हमें डर है कि कहीं उसके साथ भी कुछ गलत न कर दिया हो. हम बस यही चाहते हैं कि व्योम की कस्टडी हमें मिले. पोते को हम अपने साथ रखना चाहते हैं. एक दादा के लिए बेटे से भी बढ़कर उसका पोता होता है. सभी लोग हमारे समर्थन में हैं. कोर्ट को चाहिए कि वो पोते की कस्टडी हमें सौंपे. यही बच्चे के भविष्य के लिए सही रहेगा.

पवन मोदी ने कहा- व्योम हमारे बेटे की आखिरी निशानी है. कोर्ट को उसे हमें सौंप देना चाहिए. हम उसका अच्छे से देखभाल करेंगे. हम चाहते हैं कि अपना आखिरी समय पोते के साथ ही गुजारें. अतुल तो नहीं रहा, लेकिन पोता हमारे साथ रहेगा तो शायद हमारे दिल पर लगे कुछ घाव कम हो जाएं. हम पीएम मोदी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, बिहार के सीएम नीतीश कुमार और आरजेडी लीडर तेजस्वी यादव सहित सभी नेताओं से गुहार लगाते हैं कि हमें हमारा पोता दिलवाने में मदद करें.

चारों आरोपी गिरफ्तार

अतुल के भाई विकास मोदी ने भाभी समेत चारों आरोपियों के खिलाफ धारा 108 के तहत मामला दर्ज करवाया है. 14 दिसंबर को बेंगलुरु पुलिस ने निकिता, निशा और अनुराग को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. भारतीय कानून के मुताबिक, इस लिहाज से चारों को 10 साल जेल की सजा हो सकती है.

धारा 108 का मुकदमा

धारा 108 भारतीय न्याय संहिता से जुड़ी एक धारा है. यह धारा आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़ी है. इसके मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है और बाद में पता चलता है कि किसी और ने उसे आत्महत्या के लिए उकसाया था तो उस व्यक्ति को दस साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है. इस अपराध में, दोस्त, रिश्तेदार या कोई भी अन्य व्यक्ति शामिल हो सकता है. जल्द ही उन्हें सुनवाई के लिए कोर्ट में दोबारा से पेश किया जाएगा. अब देखना ये होगा कि कोर्ट उन्हें इस मामले में कितनी सजा सुनाता है.

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