जंगल में कहां से आया सोना और नोटों का जखीरा, कांस्टेबल से कैसे धनकुबेर बना सौरभ शर्मा?

R. S. Mehta
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मध्य प्रदेश के परिवहन विभाग में आरक्षक रहे सौरभ शर्मा की अकूत संपत्ति को लेकर जांच एजेंसियां भी हैरान हैं. फिलहाल सौरभ शर्मा अभी दुबई में है. जांच एजेंसियां उसकी भारत वापसी के लिए प्रयासरत हैं. सौरभ के ठिकानों पर इनकम टैक्स और लोकायुक्त की छापेमारी में 235 किलो चांदी सहित कुल 8 करोड़ के कैश और आभूषण मिले हैं. इसके अलावा 17 लाख की ब्रांडेड घड़ियां, 15 लाख की लेडिज पर्स और हीरे की अंगूठियां मिली हैं.

भोपाल की अरेरा कॉलोनी में सौरभ शर्मा का मकान है. यहां घर से वाहन और अन्य सामान मिले हैं, जिसकी कुल कीमत 2 करोड़ 21 लाख रुपए आंकी गई है. इसके अलावा हीरे और सोने के आभूषण (50 लाख रुपए), कैश एक करोड़ 15 लाख रुपए की बरामदगी हुई है. इसके अलावा सौरभ के ऑफिस (चेतन का मकान) से कैश 1 करोड़ 72 लाख रुपए,चांदी 234 किलो जिसकी पुलिस ने अनुमानित कीमत 2 करोड़ 10लाख आंकी है, की बरामदगी हुई है. वहीं नोट गिनने की 7 मशीनें भी मिली हैं.

भोपाल में बनवा रहा था स्कूल

इनकम टैक्स के अफसरों को पता चला है कि सौरभ भोपाल के शाहपुर B सेक्टर में 20000 वर्ग मीटर में एक स्कूल भी बना रहा था. कई बेनामी सम्पतियों के दस्तावेज भी टीम को मिले हैं, जिनकी जांच जारी है. भोपाल के मंडोरी गांव में इनोवा कार में 54 किलो सोना और लगभग 10 करोड़ रुपए की बरामदगी हुई है. आशंका जताई जा रही है कि इसके कनेक्शन कहीं न कहीं सौरभ से जुड़ रहे हैं. आयकर विभाग ने इनोवा कार के मालिक चेतन गौर से पूछताछ की है.

ड्राइवर के नाम पर पेट्रोल पंप

चेतन गौर सौरभ का वाहन चालक और करीबी है. चेतन के नाम से एक पेट्रोल पंप और ललितपुर राजगढ़ बांध परियोजना में मछली पालन का भी ठेका है. हालांकि, इन सब का वास्तविक मालिक सौरभ शर्मा ही बताया जा रहा है. सौरभ चेतन को मोहरे की तरह उपयोग कर रहा था. भरोसेमंद होने की वजह से चेतन के नाम पर ही निवेश कर रहा था. हालांकि, जांच एजेंसियां अभी बेनामी संपत्तियों के बारे में और पता लगाने में जुटी है.

सौरव और चेतन के कुछ बैंक लॉकर की जानकारी भी लोकायुक्त को मिली है. शनिवार को पुलिस लॉकर खोलने की तैयारी में थी पर चाबी नहीं मिल पाई. लॉकर में बड़ी मात्रा में नगदी और ज्वेलरी भी मिल सकती है.

कैसे आरक्षक से बना धनकुबेर?

सौरभ शर्मा ग्वालियर का रहने वाला है. उसके पिता जेल के डॉक्टर थे. सौरभ शर्मा ने महज 7 साल में अकूत संपत्ति बनाई. उसने आखिर ये कैसे किया, एजेंसियां इसकी जांच कर रही है. सौरभ शर्मा को 2017 में परिवहन विभाग में पिता की मृत्यु के बाद अनुकंपा पर कांस्टेबल कीनौकरी मिली थी. इसके बाद उसने कुछ दिन ग्वालियर में गुजारे फिर चेकपोस्ट पर नियुक्ति मिल गई. धीरे-धीरे मंत्रियों और अधिकारियों से संबंध बना लिए. चेकपोस्ट पर मिलने वाली रकम का हिसाब किताब रखने लगा. फिर सौरभ भोपाल में बस गया.

सूत्रों की माने तो सौरभ की पत्नी दिव्या शर्मा सौरभ का कारोबार संभालती है. पेट्रोल पंप क्रेशर जमीन और सोने में निवेश में दिव्या का नाम सामने आ रहा है. सौरभ शर्मा ने दो बार एमपीपीएससी की परीक्षा दी और मुख्य परीक्षा तक पहुंचा भी. एक बार तो इंटरव्यू राउंड तक पहुंचा था. पिता के निधन के बाद उसकी अनुकंपा नियुक्ति परिवहन विभाग में हो गई.

दुबई में भी सौरभ शर्मा के निवेश की आशंका

आयकर और लोकायुक्त टीम को ऐसे तथ्य मिले हैं, जिसमें सौरभ शर्मा के दुबई में भी निवेश की आशंका है. उसके घर और ऑफिस से मिले दस्तावेजों की जांच में इसकी सच्चाई सामने आएगी. वहीं सौरभ शर्मा पर हुई कार्रवाई के बाद अब राजनीति भी गरमा गई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सौरभ शर्मा को भ्रष्टाचार के समुद्र का छोटा कीड़ा बताया है. पटवारी ने कहा कि यह सौरभ शर्मा तो छोटी मछली है, जब पूर्व आरक्षक के पास इतना जखीरा मिला है तो पीएस और मंत्रीयो के पास क्या क्या होगा?

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