दुबई में RTO के पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा के पास 150 करोड़ का विला? NGO के जरिए ब्लैक मनी को किया व्हाइट

R. S. Mehta
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भोपाल। पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा के मामले में अब नए-नए  खुलासे सामने आ रहे हैं। इस मामले में जांच एजेंसियों की लापरवाही भी सामने आ रही है। इसकी वजह है पूर्व में उसके द्वारा की जाने वाली काली कमाई की शिकायत भी एजेंसियों को की जा रहीं थीं, लेकिन तब उसे गंभीरता से ही नहीं लिया गया, इस मामले का पहले ही खुलासा हो सकता था, उधर, वहीं बताया जा रहा है कि सौरभ शर्मा ने दुबई में भी निवेश किया है, यह निवेश एक विला में किया गया है। जिसकी कीमत करीब डेढ़ अरब रुपए बताई जा रही है। अभी तक अधिकृत रूप से इसकी पुष्टि नहीं हुई है। आपको बता दें कि सौरभ शर्मा ने ज्यादातर संपत्ति पत्नी दिव्या के नाम पर ही खरीदी थीं। सौरभ छापे से चार दिन पहले अपनी पत्नी के साथ दुबई चला गया था। छापा पड़ने की जानकारी के बाद सौरभ वापस नहीं आया है। बताया जा रहा है कि सौरभ शर्मा के भ्रष्टाचार की शिकायतें सीबीआई समेत कई जांच एजेंसियों को लगातार की जा रहीं थीं। लेकिन यह शिकायतें टाल दी गई थी।

सूत्रों के मुताबिक, सौरभ शर्मा के खिलाफ शिकायतों को दबा दिया गया। शिकायत में कहा गया था कि सौरभ शर्मा चेक पोस्टों से पैसे वसूलत था और अधिकारियों तक पहुंचा था। सौरभ शर्मा के खिलाफ शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं की जा रही थी यह भी अपने आप में बड़ा सवाल है। पूर्व में हुई शिकायतों में कहा गया था कि सौरभ शर्मा द्वारा अरेरा कॉलोनी में एक घर खरीदा गया है। वह इंदौर में एक होटल भी बना रहे हैं। इसके साथ ही, यह भी बताया गया था कि जांच के डर से सौरभ ने अपनी नौकरी भी छोड़ दी है। इसके बाद लोकायुक्त और अन्य एजेंसियों को सौरभ शर्मा की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिल गई थी।

इस मामले में एक अर्चना शर्मा नाम की महिला का नाम की सामने आ रहा है शिकायत में इस बात का जिक्र है। अर्चना राजमाता शिक्षा एवं समाज समिति नाम का एनजीओ चलाती हैं। उसके खाते में पैसा न होने के बाद भी उसके द्वारा 20 लाख रुपए की जमीन खरीद कर उस पर 2 करोड़ रुपये खर्च कर इमारत भी बनवाई गई है। शिकायत में कहा गया है कि अर्चना एनजीओ के माध्यम से ब्लैक मनी को व्हाइट कर रही हैं। दरअसल, अर्चना को सौरभ का बेहद करीबी माना जाता है। शिकायत में यह भी कहा गया था कि अर्चना को पैसे कहां से मिले हैं इसकी जांच होनी चाहिए। वह राजमाता शिक्षा एवं समाज समिति नाम से एनजीओ चलाती है।

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