पेपरलीक की अफवाह, DM का थप्पड़ और छात्रों का धरना… BPSC एग्जाम पर कैसे मचा इतना बड़ा बवाल?

R. S. Mehta
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बिहार क्रांति की धरती है. आजादी के आंदोलन का बिगुल फूंकने के लिए खुद महात्मा गांधी को भी इस धरती पर आना पड़ा. दूसरी आजादी का बिगुल भी इसी धरती से जयप्रकाश नारायण ने फूंका. अब एक बार फिर बिहार सुलग रहा है. इस बार चिंगारी बीपीएससी यानी बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा की वजह से लगी है. हजारों की तादात में इस परीक्षा के अभ्यर्थी मैदान में हैं. देखते ही देखते हालात ऐसे बन गए हैं कि आज एक बार फिर समूचे देश में बिहार, छात्र और आंदोलन तीनों ही चर्चा के विषय बन गए हैं. इस पूरे प्रसंग को समझने के लिए थोड़ा पास्ट में जाना होगा.

दरअसल 13 दिसंबर को बीपीएससी ने पूर्व निर्धारित 70वीं प्रारंभिक परीक्षा के आयोजन की तैयारी कर ली. इसी दौरान इस परीक्षा के अभ्यर्थियों ने नॉर्मलाइजेशन का मुद्दा उठाया. पता चला कि बीपीएससी ने भी इस मुद्दे पर बैठक बुलाई है. इस मीटिंग में कोचिंग संचालक खान सर के अलावा कुछ और कोचिंग संचालकों को शामिल किया गया था. मीटिंग के बाद ही कुछ शिक्षकों ने मीडिया से बात की. कहा कि खान सर और रहमान सर ने नॉर्मलाइजेशन का समर्थन किया है. चूंकि छात्र कभी भी नार्मलाइजेशन के पक्ष में नहीं थे. ऐसे में बीपीएससी की ओर से कहा गया कि अब छात्रों से मिलकर उनकी राय भी ली जाएगी. हालांकि यह मीटिंग हुई ही नहीं.

वायरल हुआ पत्र

स्टूडेंट लीडर रोशन के मुताबिक यह सबकुछ चल ही रहा था कि एक लेटर वायरल हो गया. यह लेटर बीपीएससी की तरफ से राज्य के सभी जिलाधिकारियों को भेजा गया था. इसमें कहा गया था कि क्वेश्चन पेपर तीन सेट में होंगे. इस पत्र के वायरल होते ही छात्र नेता दिलीप कुमार बीपीएससी अध्यक्ष से मिलने पहुंचे. उन्होंने प्रयास किया कि नॉर्मलाइजेशन के मुद्दे पर बीपीएससी का रूख जान लिया जाए, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला. इसके बाद परीक्षा की तारीख से पहले छह दिसंबर को छात्रों ने राजधानी के बेली रोड पर विरोध प्रदर्शन किया था.

धांधली की खबर ने आग में डाला घी

आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने छात्रों के ऊपर लाठीचार्ज किया. वहीं छात्र नेता दिलीप को अरेस्ट कर जेल भेज दिया गया. हालांकि उसी दिन शाम को बीपीएससी ने नोटिफिकेशन जारी करते हुए साफ कर दिया कि नॉर्मलाइजेशन नहीं होगा और एक सेट में ही परीक्षा होगी. इससे छात्र शांत होने लगे, लेकिन इसी बीच बापू परीक्षा केंद्र में धांधली का मामला सामने आ गया. इसके बाद बीपीएससी ने यहां दूसरे सेट से परीक्षा कराने का दावा किया. छात्रों की आपत्ति इसी बात से है. उनका कहना है कि एक तरह से यह नॉर्मलाइजेशन हो ही गया.

यहां से बिगड़ा माहौल

13 दिसंबर को राज्य में 912 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा हो रही थी. इसी दौरान खबर आई कि बापू परीक्षा केंद्र पर धांधली हो रही है. इस केंद्र में एक साथ करीब 12 हजार अभ्यर्थियों को बैठाया गया था. इस केंद्र के एक परीक्षा केंद्र में 273 छात्रों के बैठने का इंतजाम किया गया था. कायदे से यहां 288 प्रश्नपत्र पहुंचने चाहिए थे, लेकिन महज 192 प्रश्नपत्र ही यहां पहुंचे. ऐसे में इसी सेंटर के दूसरे केंद्र से प्रश्नपत्र मंगवाया गया, लेकिन ये प्रश्नपत्र सीलबंद लिफाफे में नहीं थे. हालांकि पटना के डीएम का कहना है कि सीलबंद लिफाफा परीक्षा केंद्र पर ही खोला गया था. इस संबंध में छात्रों को समझा भी दिया गया और उन्हें प्रश्न हल करने के लिए 20 मिनट का अधिक समय भी दिया गया. बावजूद इसके 150 परीक्षार्थी विरोध करने लगे और ओएमआर शीट लेकर बाहर चले गए. आरोप तो यह भी है कि डीएम ने एक छात्र को थप्पड़ भी मारा. इसके बाद हंगामा शुरू हो गया.

दो घंटे की परीक्षा

आयोग ने दिन में बारह बजे से दो बजे तक एक ही पाली में सभी जगहों पर परीक्षा करायी. इसके लिए परीक्षार्थियों को 11 बजे तक परीक्षा केंद्र पर पहुंचने को कहा गया था. वहीं विरोध के बाद दो बार ऐसे मौके भी आये जब आयोग की तरफ से कहा गया कि केवल बापू परीक्षा केंद्र पर ही परीक्षा रद्द हुई थी और पुनर्परीक्षा आगामी चार जनवरी को होगी. हालांकि बड़ी संख्या में परीक्षार्थी राजधानी के गर्दनीबाग में धरने पर बैठ गए. उनके समर्थन में कई कई कोचिंग संचालक भी पहुंचे. यहां तक कि खान सर और गुरू रहमान ने भी अपना समर्थन दिया.

गांधी मैदान में छात्र संसद का आयोजन

हालांकि छात्रों ने कोचिंग संचालकों पर राजनीति करने का आरोप लगाया. इस मुद्दे पर छात्रों की खान सर के साथ नोकझोंक भी हुई. इसके बाद धीरे धीरे आंदोलन उग्र होता चला गया. गर्दनीबाग में छात्रों के धरना प्रदर्शन के बीच कई विपक्षी दलों के नेता भी पहुंचे. वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पहले मोबाइल फोन पर छात्रों से बात की और बाद में वह खुद मौके पर भी पहुंचे. इसके बाद पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर भी आए.

पुलिस के साथ हुआ टकराव

प्रशांत किशोर ने ही छात्रों को गांधी मैदान स्थित गांधी मूर्ति के सामने छात्र संसद लगाने का सुझाव दिया था. इसके बाद रविवार को गांधी मैदान में छात्रों की भीड़ उमड़ पड़ी. काफी देर तक भाषण के बाद छात्रों का हुजूम राजभवन की ओर बढ़ा. इस दौरान प्रशासन ने लॉ एंड ऑर्डर की बात करते हुए छात्रों को रोकने की कोशिश की. इस दौरान पहले जेपी गोलंबर के पास छात्रों का पुलिस के साथ टकराव हुआ. नौबत यहां तक आ गई कि छात्रों की भीड़ को हटाने के लिए पानी की बौछारें तक छोड़नी पड़ी.

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