आजादी के 4 महीने बाद झारखंड में हुआ था नरसंहार… सैकड़ों लोगों पर हुई थी अंधाधुंध फायरिंग

R. S. Mehta
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लोग अलग-अलग तरीके से नए साल की शुरुआत कर रहे हैं. झारखंड के कोल्हान प्रमंडल के लोग नए साल की शुरुआत खरसावां गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देकर कर रहे हैं, जो आज से 77 साल पहले हुआ था. जब एक साथ सैकड़ों लोगों को गोली मार दी गई थी. 15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ और हर तरफ आजादी का जश्न मनाया जा रहा था. उसी वक्त देश आजादी के महज 4 महीने के अंदर एक जनवरी 1948 को जब पूरा देश आजाद भारत के पहले नववर्ष की खुशियां मना रहा था. उसी वक्त झारखंड के खरसावां जिला मैं एक ऐसा नरसंहार हुआ, जिसने जलियांवाला बाग में हुए नरसंहार की यादों को ताजा कर दिया.

खरसावां जिला में 1 जनवरी 1948 को आदिवासियों की भीड़ पर उड़ीसा पुलिस ने अंधाधुंध फायरिंग की गई थी. इसमें सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी. हालांकि मरने वालों की संख्या आज भी किसी को नहीं पता है. खरसावां गोलीकांड को उस वक्त आजाद भारत का जलियांवाला बाग कांड करार दिया गया था. खरसावां गोली कांड के 77 साल हो जाने के बावजूद इसमें मारे गए लोगों की संख्या आज भी स्पष्ट नहीं हो पाई है.

जांच के लिए ट्रिब्यूनल का गठन

घटना की जांच के लिए ट्रिब्यूनल का गठन किया गया था, लेकिन उसकी रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई. घटना में कितने लोग मारे गए. इसका कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं है. स्वतंत्रता के बाद भारत के तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में रियासतों का विलय हो रहा था. इस दौरान सिंहभूम स्टेट में आने वाले सरायकेला और खरसावां को लेकर समस्या खड़ी हो गई थी. इन दोनों क्षेत्र के लोग झारखंडी संस्कृति का पालन करने वाले थे, जबकि उनके शासक उड़िया भाषी थे.

आदिवासियों ने किया आंदोलन

उड़ीसा के शासकों ने सरायकेला और खरसावां के विलय का भी उड़ीसा में प्रस्ताव रख दिया, जो वहां की आदिवासी जनता को मंजूर नहीं था. इस प्रस्ताव को भारत सरकार ने स्वीकार भी कर लिया था. इसी फैसले के विरोध में आदिवासी समाज के सैकड़ों लोग आंदोलन कर रहे थे. एक जनवरी 1948 को खरसावां में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के महिला पुरुष हाथों में तीर धनुष और अपने पारंपरिक हथियार लेकर विरोध कर रहे थे. विरोध के दौरान उड़ीसा पुलिस की ओर से उन पर फायरिंग शुरू कर दी गई थी, जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी.

सैकड़ों में मौत का आंकड़ा

यूं तो मौत का आंकड़ा सैकड़ों में बताया जाता है, लेकिन अब तक आधिकारिक रूप से मृतकों की संख्या कितनी है. इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है. आज इस घटना को लगभग 77 साल हो गए हैं, लेकिन अब भी इस नरसंहार में मरने वालों की संख्या सामने नहीं आई है. झारखंड के कोल्हान प्रमंडल के लोग आज भी अपने नए साल की शुरुआत खरसावां गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देकर करते हैं. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी आज खरसावां गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए खरसावां पहुंचेंगे.

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