आचार्य शंकर ने सनातन धर्म और सांस्कृतिक एकता के लिए जो कार्य किया, वह सदैव पूजनीय रहेगा” : CM मोहन यादव

R. S. Mehta
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भोपाल। आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश शासन द्वारा अद्वैत वेदान्त दर्शन के लोकव्यापीकरण एवं सार्वभौमिक एकात्मता की संकल्पना के उद्देश्य से महाकुम्भ क्षेत्र के सेक्टर 18 में स्थापित एकात्म धाम मंडपम्, हरीशचंद्र मार्ग में आचार्य शंकर के जीवन दर्शन पर केंद्रित ‘शंकरो लोकशंकर:’ कथा का शुभारंम शनिवार को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, श्री योगा नन्देश्वर मठ मैसूर के मठाधिपति शंकर भारती महास्वामी की उपस्थिति में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के कोषाध्यक्ष, गीता परिवार के संस्थापक स्वामी गोविन्ददेव गिरि महाराज के मुखारविंद से हुआ। ज्ञात हो कि कथा का आयोजन 12 फरवरी तक प्रतिदिन शाम 4 बजे से होगा।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आचार्य शंकर के योगदान और अद्वैत वेदांत पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने कहा “आदि शंकराचार्य का योगदान केवल उनके समय के लिए ही नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक है। सनातन धर्म के संबंध में आज उनकी शिक्षाओं और सिद्धांतों की उपयोगिता जितनी स्पष्ट है, उस काल में इसकी कल्पना भी कठिन रही होगी। उनके कार्य अद्भुत और अद्वितीय हैं।” मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आचार्य शंकर द्वारा सनातन धर्म और सांस्कृतिक एकता के लिए किए गए कार्यों से न केवल धर्म के मूलभूत सिद्धांत पुनर्स्थापित हुए, बल्कि भारत को एकता के सूत्र में पिरोने का अद्भुत कार्य भी हुआ। आदि शंकराचार्य के कार्य और विचार आज भी चराचर जगत में पूजनीय हैं और अनंतकाल तक रहेंगे।

मध्यप्रदेश शासन की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कहा, “मध्यप्रदेश सरकार इस प्रकल्प के पुनर्जीवन और विस्तार के लिए सदैव साथ है। आचार्य शंकर की इस स्वर्णिम विरासत को आगे बढ़ाना हमारा कर्तव्य है।” “भारत की कथा उन्नत आकाश की तरह लगातार गूंजती जा रही है, और आचार्य शंकर का योगदान इस कथा को सदैव नई ऊंचाइयों तक पहुंचाता रहेगा।” राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरि ने आद्य शंकराचार्य के जीवन पर आधारित पाँच दिवसीय कथा ‘शंकरो लोकशंकर:’ के शुभारंभ अवसर पर एकात्म धाम परियोजना की सराहना करते हुए कहा, “बदलते भारत के पिछले 10 वर्षों में जितने भी प्रयोग हुए हैं, उनमें सर्वश्रेष्ठ प्रयोग मध्यप्रदेश शासन ने एकात्म धाम का निर्माण करके किया है।” श्री गिरि ने कहा, “ऐसी विकट परिस्थितियों में इस प्रकार का कार्य केवल मध्यप्रदेश सरकार ही कर सकती है। ओंकारेश्वर की पवित्र भूमि अद्वैत के सिद्धांतों और भारत की सांस्कृतिक चेतना का साक्षात्कार कराती है।” आचार्य शंकर के साहित्य और उनके योगदान की महत्ता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “राष्ट्र के चैतन्य को जाग्रत करने के लिए यदि कोई सर्वश्रेष्ठ साहित्य है, तो वह आद्य शंकराचार्य का है। उनके विचार, उनकी शिक्षाएँ और उनकी अद्वैत वेदांत की परिकल्पना हमारे राष्ट्र को नई दिशा देने में सक्षम हैं।

“एकात्म धाम हमारी संस्कृति का दीप स्तंभ है, जो आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन और प्रेरणा प्रदान करेगा। भगवान आद्य शंकराचार्य हमारी संस्कृति के प्राण हैं और उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे।” उन्होंने कथा के प्रथम दिवस पर आचार्य शंकर द्वारा बाल्यकाल के दौरान माता लक्ष्मी की महिमा में कनकधारा स्तोत्र की रचना, पूर्णा नदी में संन्यास लेना व माता आर्यम्बा के प्रति आचार्य शंकर के करुणा भाव आदि वृत्तांतों का उल्लेख किया। इस अवसर पर साधु संतो सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।

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