68 लाख, 3 घंटे और फ्लाइट का यूटर्न… पावरफुल विधायक के ‘गुमशुदा’ बेटे की कहानी

R. S. Mehta
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महाराष्ट्र राज्य के पूर्व मंत्री और शिंदे गुट के विधायक तानाजी सावंत के बेटे के अपहरण की झूठी खबर ने सोमवार को राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दिया था. आज मंगलवार को भी इस हलचल की धमक मंत्रालय से लेकर विरोधी पार्टियों के खेमे में दिखाई दे रही है. आज संजय राउत ने तंज कसा की अमीरों के लड़के जब भागते हैं तो वो बैंकॉक जाते हैं और गरीबों के लड़के मुफलिसी में जीते हैं.

हालांकि, हकीकत में तानाजी सावंत के बेटे का अपहरण नहीं हुआ था, बल्कि वह अपने दोस्तों के साथ बैंकॉक गए थे. तानाजी सावंत के बेटे ऋषिराज सावंत सोमवार शाम करीब 4:30 बजे स्विफ्ट कार में बैठकर पुणे के लोहगांव हवाई अड्डे पहुंचे थे. वहां से ऋषिराज अपने दोस्तों के साथ चार्टर्ड विमान से बैंकॉक के लिए रवाना हुए थे. सूत्रों के अनुसार, ऋषिराज सावंत ने इस बैंकॉक यात्रा पर करीब 68 लाख रुपये खर्च किए थे.

चार्टर्ड प्लेन को चेन्नई में उतरवाया

उनका विमान अंडमान-निकोबार तक पहुंच चुका था, लेकिन पुणे में मचे हड़कंप के बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क कर इस चार्टर्ड प्लेन को चेन्नई में उतारने के लिए मजबूर किया गया. इसके बाद विमान से बाकी यात्री बाहर निकले और यह विमान रात 9 बजे पुणे के लोहगांव हवाई अड्डे पर वापस पहुंचा.

इस पूरे ड्रामे पर पूर्व मंत्री तानाजी सावंत का बयान सामने आया है. इस पूरे घटनाक्रम पर तानाजी सावंत ने मीडिया से बात की. उन्होंने कहा, ‘ऋषिराज और मेरे बीच किसी तरह का कोई विवाद नहीं था. हमने रात को साथ बैठकर बातें कीं. प्रदोष होने के कारण उसने सुबह रुद्राभिषेक किया. इसके बाद हम दोनों अपने-अपने काम में लग गए. आठ दिन पहले ही वह दुबई गया था, इसलिए मुझे समझ नहीं आया कि वह अचानक फिर से बैंकॉक कैसे चला गया. दिनभर कई बार हमारी फोन पर बात होती थी, लेकिन वह अचानक एयरपोर्ट क्यों गया, यह मेरी समझ से परे था इसीलिए हमें चिंता हुई. उसके साथ उसके दोस्त थे, लेकिन क्या वह इस डर से कि पापा नाराज होंगे, मुझसे कुछ नहीं बोला? यह अब उसी से सुनने के बाद ही साफ होगा.”

तानाजी सावंत की ताकत का लगा अंदाजा

अब इस पूरे मामले से जुड़ी और क्या जानकारी सामने आएगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं. वहीं, इस हाइप्रोफाइल मामले और तानाजी सावंत की ताकत का अंदाजा न सिर्फ पुणे बल्कि पूरे महारष्ट्र को लग गया. कैसे उन्होंने महज 3 घंटे में अपने गुमशुदा बेटे को न सिर्फ पता लगवा लिया बल्कि सकुशल बैंकॉक के रास्ते यूटर्न मरवा कर पुणे बुला लिया.

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