लव मैरेज क्यों नहीं टिकती, लिवइन सही या गलत…. क्या कहते हैं मटुकनाथ?

R. S. Mehta
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वेलेंटाइन सप्ताह चल रहा है और इसमें मौके परलव गुरु के नाम से प्रसिद्ध प्रोफेसर मटुक नाथ की चर्चा ना हो तो बात ही अधूरी होगी. टीवी9 भारतवर्ष ने मौसम और माहौल को देखते हुए प्रोफेसर मटुक नाथ से बात की. उनका मानना है कि लव मैरेज को सफल और असफल की तराजू पर नहीं तौला जा सकता. बल्कि लव मैरेज को लेकर यह सवाल बनता है कि यह टिकाऊं है कि नहीं. मटुक नाथ कहते हैं कि लव मैरेज जीवंत होता है, इसलिए यह टिकाऊं हो ही नहीं सकता. अब यदि इसे कोई असफल कहे तो यह गलत होगा. कारण कि प्रेम होना ही अपने आप में सफलता है.

मटुक नाथ अरेंज मैरेज का विरोध करते हैं. कहते हैं कि लव मैरेज और अरेंज मैरेज में काफी अंतर होता है. बड़ा अंतर यह होता है कि लव मैरेज में उसी लड़की से शादी होती है जिससे आप प्यार करते हैं. ऐसे में शादी के बाद प्रेम और बढ़ जाता है. जबकि अरेंज मैरेज में ऐसा नहीं होता. उन्होंने कहा कि जहां तक लव मैरेज के टूटने का सवाल है तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं. यदि प्रेम खत्म हो गया तो बिना प्रेम के जीवन गुजारने से अच्छा अलग हो जाना ही है.

शादी को बताया स्वतंत्रता का हनन

प्रोफेसर मटुक नाथ शादी की व्यवस्था को ही उचित नहीं मानते. वह कहते हैं कि शादी का मतलब बंधन होता है. इसमें आदमी बंधकर रह जाता है और उसकी स्वतंत्रता चली जाती है. जबकि लिवइन में ऐसा नहीं है. वह कहते हैं कि उन्होंने खुद जूली के साथ लंबे समय तक लिवइन में रहे हैं और इसका उन्हें अच्छा अनुभव है. वह कहते हैं कि आप युवा है, बालिग हैं और आपको किसी लड़की से प्रेम है तो आप उसके साथ रह सकते हैं. इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए. यदि किसी लड़के के माता-पिता या कोई अन्य इसका विरोध करता है तो वह मूढमति है.

समलैंगिंग संबंधों को बताया लाचारी में बना संबंध

टीवी9 भारतवर्ष से बात करते हुए मटुकनाथ ने समलैंगिक संबंधों पर भी खुलकर टिप्पणी की. वह कहते हैं कि आम तौर पर बचपन या किशोरावस्था में लड़कों को लड़कियां सुलभ नहीं होती और लड़कियों को भी लड़के सुलभ नहीं होते. ऐसे में लोग लाचारी में समलैंगिंक संबंध बनाने लगते हैं. हालांकि दो लोगों के बीच का नितांत व्यक्तिगत मामला है. इसमें किसी तीसरे को हस्तक्षेप करने का कोई मतलब नहीं है.

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