पंजाब में Registry कराने वालों के लिए जरूरी खबर, खड़ी हुई नई मुसीबत

R. S. Mehta
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अनाधिकृत प्लांटों की रजिस्ट्रियां करवाने के लिए रजिस्ट्रियाें की अपॉइंटमैंट न मिलने कारण लोगों को परेशान होना पड़ रहा है, क्योंकि अपॉइंटमैंट कम हैं और प्लाट ज्यादा होने के कारण बहुत सारे लोग रोजमर्रा आते हैं और उनको अपॉइंटमैंट न मिलने कारण वापस जाना पड़ रहा है और जिस हिसाब से अपॉइंटमैंट नहीं मिल रही, उससे साफ है कि बहुत सारे लोग सरकार की तरफ से दिए इस लाभ का फायदा नहीं उठा सकेंगे।

यहां वर्णनयोग है कि पटियाला में प्रतिदिन की 250 अपॉइंटमैंट और समाना में जैसे कि 50 अपॉइंटमैंट होती हैं। जबकि प्लाट हजारों की संख्या में हैं और इसमें रैगुलर रजिस्ट्रियां भी आ जाती हैं। यहां यह भी जिक्रयोग है कि इसमें कई बार जैसे सारस मेला या फिर कोई अन्य वी.आई.पी. दौरे के कारण तहसीलदार साहिब को वहां जाना पड़ जाता है तो भी नंबर पीछे रह जाते हैं। इसमें लोग मानसिक और आर्थिक लूट का शिकार हो रहे हैं। यहां यह भी वर्णनयोग है कि जब सरकार ने अनाधिकृत कालोनियों की बिना एन.ओ.सी. से रजिस्ट्री करवाने का ऐलान किया तो लोगों में बहुत खुशी की लहर देखने को मिल थी क्योंकि बड़ी संख्या में 2 दशकों में अनाधिकृत कलोनियां काटीं गई थीं, परन्तु कालोनियों के पास न होने के कारण लोगों ने प्लाट तो ले लिए थे परन्तु उनकी रजिस्ट्रियां नहीं हो रही थीं। सरकार के इस फैसले के साथ कोई ऐसे लोग थे जिन अपनी जिंदगी भर की कमाई के साथ प्लाट तो ले लिए थे परन्तु उनकी रजिस्ट्री न होने के कारण लोगों को उनका हक नहीं था मिल रहा।

सरकार अनाधिकारत कलोनियों की रजिस्ट्रियाें की तारीख बढ़ाए : प्रदीप सिंह अंटाल ननानसुं
एच.आर. ग्रुप के मैनेजिंग डायरैक्टर प्रदीप सिंह अंटाल ननानसुं ने सरकार से मांग की है कि अनाधिकारत कालोनियों की बिना एन.ओ.सी. से रजिस्ट्रियां की जो आखिरी तारीख 28 फरवरी है, उसे बढ़ाया जाए, तो कोई भी व्यक्ति इस का लाभ लेने से वंचित न रह जाए। उन्होंने कहा यह सरकार का एक महत्वपूर्ण फैसला था, जिस के साथ लोगों को उन प्लाटों के हक मिल गए और सरकार बड़े स्तर पर रैवेन्यू आया। उन्होंने कहा कि लोगों की यह लम्बे समय की मांग थी, जिसको सरकार ने स्वीकृत करते हुए यह छूट दी थी, परन्तु तकनीकी कारणों करके इस समय में सभी लाभपात्री इस का लाभ नहीं ले डाल रहेे, इसलिए सरकार इस में छूट दे, जिससे लोगों के लम्बे से चल रहे क्लेश खत्म होने और सरकार के खजाने में रोजाना करोड़ों रुपए का वित्त भी इकट्ठा हो।

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