पाकिस्तान में बिलावल-शरीफ और इमरान ही नहीं, आतंकी भी बना रहे गठबंधन

R. S. Mehta
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दुनिया में जहां एक ओर राजनीतिक दल सत्ता में आने के लिए गठबंधन बनाते हैं, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों के बीच नए गठबंधन बन रहे हैं. हाल ही में पेशावर से ताल्लुक रखने वाले कमांडर मुफ्ती मुजम्मिल के नेतृत्व में एक आतंकी गुट ने हाफिज गुल बहादुर (HGB) समूह के साथ विलय कर लिया है. यह घटनाक्रम पाकिस्तान के लिए सुरक्षा के लिहाज से बेहद चिंताजनक है.

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और उत्तर वजीरिस्तान में सक्रिय आतंकी गुटों के बीच हाल के दिनों में कई अहम बदलाव देखने को मिले हैं. सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, कमांडर मुफ्ती मुजम्मिल के आतंकी गुट ने हाफिज गुल बहादुर के नेतृत्व वाले समूह से हाथ मिला लिया है. यह गठबंधन इस क्षेत्र में आतंकवाद की नई चुनौती पैदा कर सकता है.

एक और आतंकी गठबंधन

खैबर जिले के बारा इलाके से आतंकी कमांडर अली बड़ा के गुट ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) में विलय किया. अली बड़ा के इस फैसले से TTP के प्रभाव और ताकत में इजाफा हो सकता है. यह गुट अब TTP प्रमुख नूर वली महसूद के नेतृत्व में काम करेगा. सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक नई चुनौती बन सकता है. पाकिस्तान में हाल के दिनों में आतंकियों के गठजोड़ की घटनाएं बढ़ी हैं. यह विलय अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र में सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है. फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस गठबंधन पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं.

पाकिस्तान की सुरक्षा को खतरा

हाफिज गुल बहादुर समूह पहले से ही पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बॉर्डर वाले इलाकों में सक्रिय रहा है. इस आतंकी गुट पर कई हमलों को अंजाम देने का आरोप है. अब जब पेशावर के कमांडर मुफ्ती मुजम्मिल का समूह इसमें शामिल हो गया है, तो इसका प्रभाव और बढ़ सकता है. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए गठबंधन से पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों में काफी ज्यादा इजाफा देखने को मिल सकता है.

कमजोर सरकार का फायदा

पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता लंबे समय से बनी हुई है. हाल ही में चुनाव के बाद भी पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, नवाज शरीफ और बिलावल भुट्टो जैसे बड़े राजनीतिक नेताओं की पार्टियां गठबंधन की राजनीति में उलझी हुई हैं. ऐसे में आतंकी गुटों को खुली छूट मिल रही है, जिससे वे अपनी गतिविधियां तेज कर रहे हैं. विश्लेषकों का कहना है कि जब तक पाकिस्तान में राजनीतिक स्थिरता नहीं आएगी, तब तक आतंकी संगठनों के विस्तार पर लगाम लगाना मुश्किल होगा.

तालिबान कनेक्शन और खतरा

इस गठबंधन के पीछे अफगान तालिबान का प्रभाव भी नजर आ रहा है. हाफिज गुल बहादुर लंबे समय से तालिबान से करीबी संबंध रखता है. ऐसे में नए गुटों के जुड़ने से पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर सुरक्षा चुनौतियां और बढ़ सकती हैं. आतंकियों की यह बढ़ती ताकत पाकिस्तान के लिए आने वाले समय में बड़ा सिरदर्द बन सकती है. इतना ही नहीं, ये चीन के लिए भी बड़ी टेंशन है. क्योंकि पिछले कई सालों से पाकिस्तान में काम कर रहे चीन के लोगों को तालिबान निशाना बनाता रहा है.

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