300 साल पुराना मंदिर, 40 साल से बंद… क्या है काशी के सिद्धिश्वर महादेव का सच?

R. S. Mehta
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वाराणसी के मदनपुरा इलाके के गोल चबूतरा एक जगह है और यहां एक मंदिर है. कहा यह जा रहा है कि ये स्कंद पुराण के काशी खंड में सिद्धिश्वर महादेव के नाम से इस मंदिर का वर्णन है. दावा किया जा रहा है कि यह मंदिर करीब 300 साल पुराना है और करीब 40 साल से यह मंदिर बंद है. जब तक कोई विशेषज्ञ आकर इसकी जांच न करे, तब तक यह कह पाना मुश्किल है कि जो दावा किया जा रहा है, उसकी सच्चाई क्या है?

यहां पर रहने वाले कारोबारी खालिद जमाल ने बताया कि हम 45 से मंदिर को देख रहे हैं और यह तभी से बंद पड़ा है. इसकी मिलकियत ताज खान परिवार के पास है, जो यहां पर करीब 150 सालों से रह रहा है. यह पूरा इलाका बुनकरों का है. यहां पर साड़ियां बनती हैं और बिकती हैं. ‘ढूंढे काशी’ एक संस्था है, जो प्राचीन मंदिरों और प्राचीन विग्रहों की खोज करती है.

बाप-दादा के जमाने से बंद, कभी खुलते नहीं देखा

संस्था के लोग जब काशी खंड और केदारखंड में वर्णित देवताओं और मंदिरों की खोज कर रहे थे, तब इस मंदिर के बारे में उनको पता चला और फिर धीरे-धीरे यह मामला तूल पकड़ता गया. पुलिस और प्रशासन के लोगों का कहना है कि शांति-व्यवस्था बनी रहनी चाहिए. एक अन्य व्यापारी ने कहा कि हमारी 60 साल की उम्र हो गई. हमने इसको कभी खुलते नहीं देखा. यह हमारे बाप-दादा के जमाने से बंद है.

ताज बाबा से मंदिर का क्या कनेक्शन?

परिवार के सदस्य मोहम्मद जकी ने टीवी9 डिजिटल को बताया कि 1916 में बंगाल की करखी रियासत से जुड़े रईस से हमारे पूर्वज ताज बाबा ने ये प्रॉपर्टी खरीदी थी. हमने कभी इस मंदिर को खुलते हुए नहीं देखा और न कभी पूजा पाठ होते ही देखा है. अगर लोगों को लगता है कि उनके भगवान यहां विराजते हैं तो वो पूजा करें. हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन शांति-व्यवस्था बनी रहनी चाहिए.

बता दें कि संभल हिंसा के बाद जब मुस्लिम इलाके में बुलडोजर की कार्रवाई शुरू हुई तो वहां पर एक मंदिर मिला. प्रशासन ने मंदिर में विधवत पूजा-पाठ शुरू कराई. अब इसी तरह के मामले अन्य जिलों से सामने आने लगे हैं. चूंकि काशी में जो मंदिर मिला है, इसे सिद्धिश्वर महादेव का मंदिर कहा जा रहा है.

मंदिर के गर्भगृह में भरी एक फीट तक मिट्टी

ये मंदिर सघन मुस्लिम इलाके में एक अहाते के अंदर ताले में बंद था. मंदिर के गर्भगृह में करीब एक फीट मिट्टी भरी हुई है. ढूढ़े काशी संस्था के लोग इस मंदिर को करीब 300 साल पुराना बता रहे हैं, जबकि शिवलिंग को पौराणिक मान रहे हैं. संस्था के लोगों ने बताया कि इस मंदिर के बगल में सिंह कूप को भी खोज लिया गया है. ढूंढे काशी संस्था के सदस्य अजय शर्मा का कहना है कि स्कन्द पुराण के काशी खंड में वर्णित है कि…

तदग्निदिशि देवर्षिगणलिङ्गान्यनेकशः। पुष्पदन्ताद्दक्षिणतः सिद्धीशः परसिद्धिदः॥

(पुष्पदन्तेश्वर) उनसे अग्निकोण पर देवता और ऋषिगण के स्थापित बहुतेरे लिंग विराजमान हैं. उक्त पुष्पदन्तेश्वर से दक्षिण परमसिद्धिप्रद सिद्धीश्वर हैं और विधिपूर्वक इनकी पूजा करने से…

पञ्चोपचारपूजातः स्वप्ने सिद्धिं परां दिशेत्। राज्यप्राप्तिर्भवेत्पुंसां हरिश्चन्द्रेशसेवया॥

यदि कोई उनकी पंचोपचार से पूजा करे तो उसे वे स्वप्न में परमसिद्धि को जता देते हैं. हरिश्चन्द्रेश्वर के सेवन से लोगों को राज्य का लाभ होता है.

काशी विद्वत परिषद ने मंदिर पर लगाई मुहर

वहीं इस मामले में श्री काशी विद्वत परिषद की एंट्री के बाद मदनपुरा मंदिर विवाद में निर्णायक मोड़ में आ गया है. अभी तक इस मंदिर को सिद्धिश्वर महादेव कहने का जो दावा ढूंढे काशी संस्था की तरफ से किया जा रहा था, उस पर विद्वत परिषद ने मुहर लगा दी है. विद्वत परिषद जल्द ही वहां प्रतिनिधिमंडल भेजकर स्थालीय निरीक्षण कराएगा.

विद्वत परिषद ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि वहां नियमित राग भोग और दर्शन-पूजन की व्यवस्था कराई जाए. सिद्धिश्वर महादेव के मंदिर को लेकर मुस्लिम समाज से अपील की गई है कि इसे हिन्दुओं को लौटा दिया जाए.

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