‘साहब वोट मछुआरे देंगे डॉल्फिन नहीं’… मछली पकड़ने पर लगा बैन तो DM से बोले, गंगा का 72 किलोमीटर का एरिया है सील

R. S. Mehta
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क्या डॉल्फिन वोट देगी? वोट तो मछुआरे देंगे.. क्या डॉल्फिन की प्राकृतिक मौत नहीं होती? उनकी मृत्यु का आरोप सिर्फ मछुआरों पर लगाया जाता है. गंगा में मछली नहीं मारने का आदेश बहुत गलत है वन विभाग हम पर अत्याचार कर रहा है. लगातार कई महीनों से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे मछुआरा समाज के लोगों ने यह बातें आज सोमवार को डीएम कार्यालय के समक्ष धरना देते हुए कहा. दरअसल भागलपुर जिले में सुल्तानगंज से कहलगांव तक गंगा में 72 किलोमीटर तक विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन अभ्यारण्य घोषित है.

ऐसे में मछुआरों को इस दायरे में मछली मारने पर प्रतिबंध लगाया गया है. ऐसे में अगर कोई भी मछुआरा इस इलाके में मछली पकड़ा हुआ मिलता है, तो उस जाल को प्रशासन सीज कर लेता है और कार्रवाई करता है. ताकि डॉल्फिन को बचाया जा सके, लेकिन इसको लेकर मछुआरा समाज आक्रोश में है. जिलाधिकारी कार्यालय के मछुआरा समाज के लोगों ने धरना दिया और इस दौरान उन्होंने वन विभाग पर अत्याचार का आरोप लगाया है.

‘मछली मारने पर हटाया जाए प्रतिबंध’

मछुआरे मछली मारने पर प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहे हैं. फ्री फिशिंग एक्ट बनाये जाने की मांग कर रहे हैं. मछुआरों का आरोप है कि बीते 14 दिसम्बर को एक मछुआरे के साथ वन विभाग के कर्मियों ने मारपीट की, जोकि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. प्रशासन बड़े-बड़े लोगों से पैसे ले लेती है. हम लोगों को प्रताड़ित करती है. इसमें राजनीति भी होता है. डॉल्फिन तो वोट नहीं देती है वोट मछुआरा समाज देता है इसलिए कुछ राजनीतिक लोग वोट खराब करने के लिए यह काम कर रहे हैं.

सरकार के फैसले का मछुआरा समाज कर रहा विरोध

कुछ लोगों के कहने पर यह सब किया जा रहा है. गंगा में क्रूज क्यों चल रहा है क्या उससे डॉल्फिन पर असर नहीं पड़ता है. हम लोगों को मछली मारने से नहीं रोका जाए. बता दें कि भागलपुर में विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन अभ्यारण्य में तकरीबन 250 डॉल्फिन है. इसको लेकर भागलपुर में राज्य सरकार की ओर से संरक्षण के लिए पैसे खर्च किए जाते हैं, लेकिन मछुआरा समाज लगातार इस पर अपना विरोध जता रहा है.

उनका कहना है कि हम लोगों का जीवन और आजीविका पूरी तरह गंगा पर ही निर्भर है, ऐसे में यह आदेश डॉल्फिन को बचाने का सही समाधान नहीं है.

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