पहली बार ‘छावनी प्रवेश यात्रा’ में शामिल हुई महिला नागा संन्यासी, महाकुंभ में पहुंचा अटल अखाड़ा

R. S. Mehta
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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में संगम तट पर आयोजित महाकुंभ में जन आस्था के केंद्र सनातन धर्म के 13 अखाड़ों का अखाड़ा सेक्टर में प्रवेश जारी है. बुधवार को श्री शंभू पंचदशनाम अटल अखाड़े ने छावनी में प्रवेश किया. वहीं अखाड़ों के साधु संतों का छावनी प्रवेश देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी. इस दौरान अखाड़े के साधु-संत पूरे रौब से छावनी में प्रवेश किया.

आदि गुरु शंकराचार्य के प्रयास से छठी शताब्दी में संगठित रूप में अस्तित्व में आये अखाड़ों की स्थापना शस्त्र और शास्त्र दोनों को आगे बढाने के लिए की गई. शास्त्र ने अगर शंकर के धार्मिक चिंतन को जन-जन तक पहुंचाया. तो वहीं शस्त्र ने दूसरे धर्मो से हो रहे हमलों से रक्षा की. इन्ही अखाड़ों में शैव सन्यासी के अखाड़े श्री शंभू पञ्च दशनाम अटल अखाड़ा ने कुंभ क्षेत्र में प्रवेश के लिए भव्य छावनी प्रवेश यात्रा निकाली.

अलोपी बाग स्थिति अखाड़े के स्थानीय मुख्यालय से यह प्रवेश यात्रा निकाली गई. प्रवेश यात्रा में परंपरा, उत्साह और अनुशासन का खूबसूरत मेल देखने को मिला. आचार्य महा मंडलेश्वर स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती की अगुवाई मे प्रवेश यात्रा निकली गई. सबसे आगे अखाड़े के ईष्ट देवता भगवान गजानन की सवारी और उसके पीछे अखाड़े के परंपरागत देवता रहे.

नागा संन्यासियों की फौज बनी आकर्षण का केंद्र

अटल अखाड़े के छावनी प्रवेश में नागा संन्यासियों की फौज देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. इष्ट देवता गणपति के पीछे चल रहे अखाड़े के पूज्य देवता भालो के बाद कतार में नागा सन्यासी चल रहे थे. यह पहला अखाड़ा था जिसमें नागा संन्यासिनियों ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. वहीं छावनी प्रवेश में एक बाल नागा भी आकर्षण का केंद्र रहा. अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती ने कहा कि छावनी में दो दर्जन से अधिक महामंडलेश्वर और दो सौ से अधिक नागा संन्यासी शामिल थे. रथों में सवार अखाड़े के संतों का आशीर्वाद लेने के लिए लोग सड़कों के दोनों तरफ दिखे.

‘सूर्य प्रकाश’ भाला रहा आकर्षण का केंद्र

अटल अखाड़े के जुलुस में एक बात अलग से देखी गई और वो अखाड़े की प्रवेश यात्रा में सबसे आगे फूलों से सजे धजे वह भाले जिन्हें अखाड़ो के इष्ट से कम सम्मान नहीं मिलता. अखाड़े की पेशवाई में अखाड़े के जुलूस में भी आगे था “सूर्य प्रकाश” नाम का वह भाला जो केवल प्रयागराज के महाकुंभ में ही अखाड़े के आश्रम से महाकुंभ क्षेत्र में निकलता है. पांच किमी का रास्ता तय कर अखाड़े की प्रवेश यात्रा महाकुंभ के सेक्टर 20 पहुंची. रास्ते में कई जगह महाकुंभ प्रशासन की तरफ से संतों का पुष्प वर्षा से स्वागत किया गया.

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