वक्फ संशोधन विधेयक बजट सत्र में होगा पेश, JPC सौंपेगी लोकसभा स्पीकर को रिपोर्ट

R. S. Mehta
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वक्फ संशोधन विधेयक पर बनी जेपीसी अपनी रिपोर्ट 27 या 28 जनवरी को लोकसभा स्पीकर को सौंप सकती है. लोकसभा स्पीकर की मंजूरी के बाद रिपोर्ट को आगामी बजट सत्र में लोकसभा में पेश किया जाएगा. वक्फ संशोधन विधेयक पर जेपीसी रिपोर्ट के मसौदे को अंतिम देने के लिए जेपीसी की लगातार दो दिन बैठक बुलाई गई है. जेपीसी की ये बैठक कल शुक्रवार को सुबह 11 बजे शुरू होगी.

समिति की बैठक लगातार शुक्रवार और शनिवार ( कल और परसों) को बुलाई गई है. बैठक में बिल पर क्लॉज-दर-क्लॉज चर्चा होगी और रिपोर्ट के मसौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा.

जेपीसी के सदस्यों को बिल पर मेल या फिजिकल तरीके से संशोधन देने के लिए 22 जनवरी शाम 4 बजे तक का समय दिया गया था जो बीत चुका है.

शुक्रवार और शनिवार होगी बैठक

समिति को बिल में शामिल करने के लिए कई संशोधन मिले है उन संशोधनों पर भी दो दिनों की बैठक में चर्चा और जरूरत पड़ी तो वोटिंग होगी. गौरतलब है कि जेपीसी के कुछ विपक्षी दल के सदस्यों ने JPC की बैठक टाल कर 30 और 31 को करने की मांग की थी जिसे जेपीसी चेयरमैन ने नहीं माना.

लोकसभा द्वारा वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति के कार्यकाल को बढ़ाने के प्रस्ताव को पारित करने के दो महीने बाद, माना जा रहा है कि समिति आगामी बजट सत्र में अपनी 500 पन्नों की रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकती है. अब तक समिति ने दिल्ली में 34 बैठकें की हैं और कई राज्यों का दौरा किया है, जहां 24 से अधिक हितधारकों को बुलाया गया था.

दो महीने के बाद समिति सौपेंगी रिपोर्ट

देश भर से 20 से अधिक वक्फ बोर्ड समिति के समक्ष उपस्थित हुए हैं. विपक्ष की आपत्तियों के बाद केंद्र ने विधेयक को आगे की जांच के लिए समिति को भेज दिया था. समिति के 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा सदस्यों में से 13 विपक्षी दलों से हैं – निचले सदन में नौ और उच्च सदन में चार सदस्य हैं. बता दें कि बसमिति के अध्यक्ष जगदम्बिका पाल हैं, जो उत्तर प्रदेश से भाजपा सांसद हैं.

उन्होंने दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, गुवाहाटी, भुवनेश्वर, कोलकाता, पटना और लखनऊ की यात्रा की थी. सभी हितधारकों, राज्य सरकार के अधिकारियों, वक्फ बोर्डों, अल्पसंख्यक आयोगों, उच्च न्यायालय के वकीलों, इस्लामी विद्वानों, पूर्व न्यायाधीशों, कुलपतियों, अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सदस्यों और विभिन्न तंजीमों (संगठनों) से मुलाकात की थी.

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