अंकिता राठौर और हसनैन अंसारी की लव स्टोरी क्या रह जाएगी अधूरी? शादी पर इस वजह से लगी रोक

R. S. Mehta
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मध्य प्रदेश के जबलपुर में बहुचर्चित अंकिता राठौर और हसनैन अंसारी के लव जिहाद मामले में बड़ा फैसला आया है. अपर कलेक्टर एवं विवाह अधिकारी नाथू राम गौड़ की कोर्ट ने स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 की धारा 5 के तहत उनकी शादी के आवेदन को खारिज कर दिया है. आवेदन खारिज किए जाने का मुख्य कारण यह था कि हसनैन अंसारी आवेदन में दिए गए पते पर नहीं रह रहे थे.

जांच में पता चला कि हसनैन पिछले 10 साल से बताए गए पते पर नहीं रह रहे थे, जिसके चलते आवेदन निरस्त किया गया. इस फैसले का विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने स्वागत किया है. संगठनों ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से लव जिहाद जैसे मामलों की रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है. इन संगठनों ने यह भी कहा कि इस तरह की शादियों के आवेदन से पहले बड़े अखबारों में नोटिफिकेशन देना अनिवार्य किया जाए, ताकि समय रहते स्थिति स्पष्ट हो सके वही पूरे मामले में हिंदू संगठनों की ओर से आपत्ति भी जताई थी.

अक्टूबर 2024 में दिया था आवेदन

इंदौर की अंकिता राठौर और जबलपुर के सिहोरा के रहने बाले हसनैन अंसारी ने 7 अक्टूबर 2024 को विवाह आवेदन दिया था. दिसंबर 2024 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने स्पेशल हिंदू मैरिज एक्ट के तहत शादी की अनुमति दी थी, लेकिन हिंदूवादी संगठनों और लड़की के माता-पिता ने इस शादी का विरोध किया. लड़की के माता-पिता ने अपहरण की रिपोर्ट भी दर्ज करवाई थी और प्रशासन से मांग की थी कि लड़की को उनके सुपुर्द किया जाए. वहीं, हिंदूवादी संगठनों ने विरोध करते हुए दावा किया कि मुस्लिम लड़के और हिंदू लड़की के बीच विवाह मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत वैध नहीं है. उन्होंने मई 2024 में जस्टिस अहलूवालिया के फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि इस तरह के विवाह धर्म परिवर्तन की संभावना को जन्म देते हैं.

विधायक ने दी फैसला बदलने की सलाह

बीते दिन हैदराबाद के विधायक टी. राजा सिंह और अन्य संगठनों ने भी इस मामले में कड़ा विरोध जताया था. हैदराबाद के विधायक और हिंदूवादी नेता टी राजा सिंह ने इस मुद्दे पर सरकार और मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी. उन्होंने कहा कि यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश में लव जिहाद के ऐसे और मामले सामने आएंगे. उन्होंने हिंदू संगठनों से अंकिता के परिवार को हर संभव मदद देने की अपील की है. टी. राजा सिंह ने अंकिता को अपना फैसला बदलने का सुझाव देते हुए कहा कि भविष्य में उसे इस निर्णय पर पछताना पड़ सकता है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में जाने की भी बात कही गई थी, लेकिन विवाह आवेदन खारिज होने के बाद इस विवाद ने नया मोड़ ले लिया.

हाईकोर्ट में हुई याचिका पर सुनवाई

पिछले सप्ताह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत एव जस्टिस विवेक कुमार जैन की डबल बेंच में इस याचिका पर सुनवाई हुई. कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 की धारा 4 के तहत किसी भी जोड़े को शादी का अधिकार है. कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रेमी जोड़े की शादी के रास्ते में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए. युवक और युवती ने सुनवाई के दौरान अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद हाई कोर्ट ने पुलिस और प्रशासन को उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि शादी से एक माह तक प्रेमी जोड़े को पुलिस सुरक्षा दी जाए.

पुलिस-प्रशासन को दिया निर्देश

इसके अलावा, संबंधित जिले के एसपी को निर्देशित किया गया कि सुरक्षा की आवश्यकता के अनुसार कदम उठाए जाएं. कोर्ट ने मैरिज कोर्ट को निर्देश दिया कि अंकिता और हसनैन की शादी बिना किसी रुकावट के कराई जाए. यदि किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है, तो पुलिस और प्रशासन तत्काल एक्शन लें. कोर्ट ने यह भी कहा कि यह मामला केवल दो व्यक्तियों का नहीं है, बल्कि उनके संवैधानिक अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा है. लड़की के पिता द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा था कि स्पेशल मैरिज एक्ट का उद्देश्य धर्म, जाति, और समुदाय की सीमाओं से परे जाकर विवाह को मान्यता देना है. अदालत ने कहा कि यह अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त है जिसे कोई बाधित नहीं कर सकता.

वहीं, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के विभाग संयोजक सुमित सिंह ठाकुर ने इस निर्णय को सही ठहराया और इसे हिंदू समाज की जीत बताया. इस प्रकरण से यह स्पष्ट होता है कि ऐसे मामलों में सामाजिक और धार्मिक संगठन लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. फैसले ने न केवल प्रशासनिक कार्यशैली बल्कि समाज में फैले सांप्रदायिक तनाव को भी उजागर किया है.

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