इजराइली सेना के कब्जे से लड़ने चले लेबनानी नागरिक, फिर शुरू किया रिटर्न मार्च

R. S. Mehta
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हिजबुल्लाह और इजराइल के बीच हुए समझौते के बाद भी इजराइली सेना लेबनान के कुछ गांवों से पीछे नहीं हटी है. जिसके बाद लेबनान और इजराइल के बीच फिर से तनाव बढ़ने की संभावना बढ़ गई है. रविवार की सुबह लेबनान के दक्षिणी हिस्से में सीमावर्ती गांवों के लिए जाने वाले रास्तो पर नागरिक एकत्रित हुए, ये लोग उन लोगों के समर्थन में इकट्ठा हुए हैं, जो अपने गांवों को इजराइली सेना से आजाद कराने की कोशिश कर रहे हैं.

लोगों ने इस प्रदर्शन को ‘द संडे ऑफ रिटर्न-2’ का नाम दिया है. लेबनानी न्यूज पोर्टल अल मायादीन के मुताबिक दक्षिण लेबनान के डेयर मीमास गांव में भीड़ ने प्रदर्शन के दौरान टेंट लगा धरना दे दिया है. खबर है कि इस बीच यारून में इजराइली सैनिकों ने नागरिकों को रोकने और उनकी वापसी में बाधा डालने के लिए उन पर गोलीबारी की.

नागरिकों ने गांव आजाद कराने का उठाया बेड़ा

पूर्वी लेबनान के बालबेक के नागरिक भी सीमा से सटे गावों की ओर आगे बढ़ रहे हैं. अल-मायदीन के रिपोर्टर से एक निवासी ने कहा, “हम दक्षिण के अपने लोगों के साथ खड़े होने आए हैं.” खबरों के मुताबिक इजराइली सेना बिंट जेबिल जिले में ऐतरौन के बाहरी इलाकों में घरों में आग लगा रही हैं और सेंट्रल तैबेह में शहीदों के शवों को निकालने के लिए काम कर रहे बुलडोजर पर बम गिराया है.

इजराइली आक्रमकता का जवाब दे रहे नागरिक

नागरिक रिटर्न मार्च उस समय कर रहे हैं, जब इजराइली सेनाएं रेज्यूलेशन नंबर 1701 और लेबनान के साथ संघर्ष विराम समझौते का उल्लंघन जारी रखे हुए हैं. खासकर से कब्जे वाले फिलिस्तीन की सीमा पर स्थित आगे के गांवों में, जबकि समझौते के तहत इजराइल को यहां से 60 दिन के अंदर वापसी करनी थी. हालंकि व्हाइट हाउस ने इस वापसी की तारीख को फरवरी तक बढ़ा दिया है. इजराइल का तर्क है कि लेबनान सेना ने गांवों को संभालने में देरी दिखाई है, इसलिए हिजबुल्लाह की वापसी के डर से इजराइल ने सेना तेनात रखी है.

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