अरविंद केजरीवाल के लिए लकी रहा है वैलेंटाइन वीक, क्या इस बार भी दिल्ली वाले करेंगे पसंद?

R. S. Mehta
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दिल्ली के नतीजे और वैलेंटाइन वीक का फिर से संयोग बन रहा है. दरअसल, आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल के लिए वैलेंटाइन वीक लकी रहा है. इस बार भी 8 फरवरी को नतीजे के दिन वैलेंटाइन वीक का दूसरा दिन है. पूरी दुनिया में वैलेंटाइन के दूसरे दिन को युगल जोड़ी प्रपोज डे के तौर पर मनाते हैं. इस दौरान प्रेमी-प्रेमिका एक दूसरे से प्रेम का इजहार करते हैं.

अरविंद केजरीवाल के लिए टफ है चुनाव

2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव को अरविंद केजरीवाल के लिए काफी कठिन माना जा रहा है. अब तक 14 में से 12 एग्जिट पोल ने अपने दावे में अरविंद की पार्टी की स्थिति को खस्ता हाल बताया है. इन सभी 12 एग्जिट पोल में दावा किया गया है कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी चुनाव में हार रही है.

2013 में पहली बाद अरविंद केजरीवाल को दिल्ली चुनाव में बड़ी जीत मिली थी. 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव में भी अरविंद की पार्टी ने जीत हासिल की थी. 2012 में नवगठित आप को 2022 में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला था.

अरविंद के लिए लकी रहा है वैलेंटाइन वीक

सियासी तौर पर अरविंद केजरीवाल के लिए वैलेंटाइन वीक लकी रही है. 2013 के दिसंबर में अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन 49 दिन बाद ही 14 फरवरी 2014 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. 14 फरवरी को वैलेंटाइन वीक का आखिरी दिन माना जाता है.

अरविंद केजरीवाल की पार्टी इसके बाद मजबूती से लोकसभा चुनाव में उतरी, लेकिन पंजाब छोड़ पार्टी को कहीं सफलता नहीं मिल पाई. हालांकि, इसके ठीक एक साल बाद हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप ने 67 सीटों पर जीत हासिल कर ली.

जीत के बाद अरविंद ने शपथ के लिए वैलेंटाइन वीक का आखिरी दिन यानी 14 फरवरी को चुना. अरविंद ने शपथ के बाद दिल्ली की जनता से वैलेंटाइन की तरह ही हमेशा प्रेम रखने की बात कही.

2020 के विधानसभा चुनाव में भी अरविंद केजरीवाल की पार्टी को वैलेंटाइन वीक में ही जीत मिली. हालांकि, इस साल केजरीवाल ने शपथ 16 फरवरी को ली थी.

दिलचस्प बात है कि 2022 में पंजाब और गोवा के लिए भी 14 फरवरी को ही मतदान हुआ था. पंजाब में आप की सरकार बनी, जबकि गोवा में भी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया.

अरविंद केजरीवाल का सियासी करियर

आईआईटी खरगपुर से पढ़ाई करने के बाद अरविंद केजरीवाल इंडियन रेवेन्यू सर्विस से जुड़ गए. नौकरी के दौरान ही केजरीवाल परिवर्तन नाम से एक एनजीओ चलाते थे. संदीप दीक्षित के मुताबिक राजनीति कैसे की जाती है, यह सीखने के लिए अरविंद केजरीवाल पूरे एक दिन दिल्ली के मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के घर रुके थे.

2011 के आसपास पूरे देश में जब भ्रष्टाचार को लेकर आंदोलन शुरू हुआ, तो अरविंद फ्रंटफुट पर आ गए. अन्ना आंदोलन में अरविंद ने बड़ी भूमिका निभाई. यह आंदोलन जनलोकपाल को लेकर था. अन्ना आंदोलन के बाद अपने कुछ करीबी साथियों के साथ अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी की स्थापना की.

2013 में वे पहली बार दिल्ली के रण में उतरे. अरविंद की पार्टी के पास दिल्ली के अलावा गुजरात, पंजाब, गोवा और जम्मू कश्मीर जैसे राज्यों में विधायक हैं. अरविंद की पार्टी के पास राज्यसभा में 10 और लोकसभा में 3 सांसद हैं.

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